रीति और रति की विस्मृत दुनिया: रीतिकाल और कवि देव

Tuesday Seminar
Speaker: 
Mrityunjay Tripathi
Date and Time: 
Tue, 24/09/2019 - 12:00am
Schedule: 
03:30 PM to 05:00 PM
Venue: 
LH 534 (Unusual venue)

Abstract: हिंदी आलोचना की प्रारम्भिक बहसों से सूत्र लेते हुए यह पर्चा हिंदी की रीति कविता [सम्वत् 1600-1900] के बारे में औपनिवेशिक, राष्ट्रवादी व मार्क्सवादी आलोचना सरणियों द्वारा बनाई धारणाओं की समीक्षा करेगा और ब्रज कविता की परम्परा के खंडित हो जाने के कारणों पर विचार करेगा। रीति कविता के आंतरिक संगठन के भीतर से तात्कालिक काव्य-संसार, काव्य रूढ़ियों व सौंदर्य दृष्टि की एक झलक दिखाने की कोशिश के साथ ही यह पर्चा समकालीन पाठक के काव्य-बोध से उसकी भिन्नता को रेखांकित करेगा। देव कवि की कविताओं के विश्लेषण के जरिये यह पर्चा ब्रज कविता की उन विशिष्टताओं को चिन्हित करेगा जो वैकल्पिक आधुनिकताओं की ओर ले जाती हैं और हिंदी पट्टी के काव्य बोध में अभी भी कहीं गहरे पैठी हुई हैं। उत्तर मध्यकाल की ब्रज कविता में यौनिकता के सवाल को भी इस प्रक्रिया में परखा जाएगा जिसका एक छोर भक्ति कविता और दूसरा अपनी समकालीन उर्दू कविता में दर्ज है।

Short Bio:
Assistant Professor, Hindi programme
School of Undergraduate Studies
Ambedkar University Delhi